भारतीय नारी के प्रेम करने का तरीका/ The way to love Indian woman

भारतीय नारी  के प्रेम करने का तरीका ,

             अभी-अभी टीवी पर फिल्म खत्म हुई थी, वेदांत ने सोफे पर बैठी हुई अपनी पत्नी देवयानी से पूछा की तुमने कभी भी आज तक मुझे आई लव यू नहीं कहा ऐसा क्यों ? जबकि तुम्हारी इंग्लिश बहुत अच्छी है कॉलेज की टॉपर हो और  हमारी शादी को कितने साल हो गए , देवयानी ने मुस्कुराकर कहा भारतीय स्त्री के और पाश्चात्य स्त्री के  प्रेम करने में अंतर होता है भारतीय स्त्री के प्रेम की  अभिव्यक्ति भावना प्रधान होती है पाश्चात्य स्त्री के प्रेम की अभिव्यक्ति शब्द प्रधान होती है।

 हम जब सुबह उठते हैं तो अभिमान फ़िल्म की जया भादुरी की तरह आपको गरम-गरम चाय देते हैं यह हमारे प्रेम करने का पहला तरीका होता है फिर आपके लिए और बच्चों के लिए आपकी पसंद का नाश्ता , उसके बाद आपकी पसंद का लंच  और उसमें रोज नयापन लाने की कोशिश, शाम को आपके साथ बैठकर चाय पीना या आपकी प्रतीक्षा करना, फिर साथ साथ डिनर करना । कभी आपकी तबीयत खराब होती है तो आपकी पूरी सेवा करना , घर में आपके मम्मी पापा और मेहमानों का आदर सत्कार करना,बच्चों को अच्छे संस्कार देना,प्यार देना ,पूरे घर को संभालते हुए सबका ख्याल रखना,  आपके गुस्से को प्यार ही  समझना ,आपकी दीर्घायु के लिए करवाचौथ का व्रत रखना तथा इस दिन  आपके अनेक बार मना करने के बावजूद आपके चरण स्पर्श करना,होली पर बच्चो के उठने से पहले सुबह सुबह आपके गालो पर प्यार का रंग गुलाबी रंग  सोते में लगा देना, समर वेकेशन में दो माह मायके में रहते हुए भी रोज आपको याद करना, सोना चांदी गहने साड़ी खरीदते वक्त आपकी इनमें कोई रुचि न होते हुए भी आपकी पसंद को प्राथमिकता देना ,आपसे झगड़ा होने पर थोड़ा रो लेना  तथा उसके बाद आपके मनाने पर दो घण्टे से ज्यादा न रूठना वैसे भी आप इस मनाने की कला में माहिर हो, और सुख दुख में आपके साथ खड़े रहना, यह सब प्रेम ही तो है अब बताईयेआपको शब्द चाहिए या भाव ?

 वेदांत मुस्कुराते हुए उठा और बोला आज की चाय मैं बनाऊंगा और कुछ देर में वह चाय बना कर लाया और चाय पीते हुए देवयानी से पूछा कैसी लगी चाय ? देवयानी ने कहा  बहुत टेस्टी जो कि वास्तव में बहुत खराब बनी थी । वेदांत ने कहा इतनी खराब चाय  को अच्छी कहती हो तब देवयानी ने हँसते हुए कहा  कि आपकी  खराब चाय  को भी अच्छा कहना यह भी प्रेम है और दोनों ठहाका लगा कर हँसे और तभी देवयानी उठी और बोली सूर्यास्त होने को है मैं पूजा  करके आती हूं । वेदांत सोफे पर टिक् कर आंखे बंद कर सोचता रहा शब्द कितने उथले होते हैं और भाव कितने गहरे , तभी लाइब्रेरी से बच्चे दौड़ते हुए आए छोटी बेटी ने पापा की नाक को दबाते हुए कहा  पापा आपकी यह किताब लाइब्रेरी से चेंज करके लाए बड़ी बेटी ने कहा यह हमारी पसंद की है  छोटी बोली नहीं हमारी पसंद और इस शोरगुल में देवयानी ने पुकारा  चलो तीनो जल्दी आओ आरती ले लो आरती लेते समय वेदांत और देवयानी के बीच साइलेंट  कम्युनिकेशन हुआ जिसका अर्थ था मुझे शब्द नहीं भाव चाहिए !!

  कहानीकार -सुधीर सिंह गौर

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The way to love Indian woman,

                                     The film had just finished on TV, Vedanta asked his wife Devyani, sitting on the couch, that you never said I love you till today, why? While your English is very good to be a college topper and how many years has passed since our marriage, Devyani smiled and said that there is a difference between the love of an Indian woman and a Western woman, the expression of love of an Indian woman is the predominant feeling of western woman. The expression of the word is prime. When we wake up in the morning, like Jaya Bhaduri of Abhimaan film, we give you hot tea, this is the first way of our love, then for you and the children, your breakfast of choice, then your lunch of choice and to bring newness in it everyday Try, sitting or drinking tea with you in the evening, then having dinner together. Sometimes your health is bad, then serve you fully, give respect to your mother and father in the house, Giving children good values, giving love, Take care of everyone while handling the whole house, consider your anger as love, keep the fast of Karvachauth for your longevity and touch your feet in spite of your refusal many times on this day. Morning before the kids wake up on Holi festival Put a pink color of love on your cheeks, remember you every day while staying at a mummy’s house in summer vacation, prioritize your choice while buying gold silver jewelery saree, cry a little when you are quarreling Take and after that do not spend more than two hours on your persuasion, anyway you are expert in the art of celebrating it, and standing with you in happiness and sorrow is all love, now tell me, do you need words or expressions? Vedanta woke up smiling and said that I will make tea today and after some time he brought tea and brought it to tea and asked Devayani, how was the tea? Devyani said very tasty which was really very bad. Vedanta said that when you say such a bad tea is good, Devayani laughed and said that it is love to call your bad tea also good and both laughed with laughter and then Devayani woke up and said that it is sunset, I come to worship. Vedanta kept on the couch and closed his eyes thinking how shallow the words were and how deep the expressions were, when the young daughter came running from the library, pressing the father’s nose and said, “Look, Papa, have brought this book from the library.” The elder daughter said that it is our choice, not the younger dialect, our choice and in this noise, Devyani called out, “Come all three hurry, take the aarti” While taking the aarti, there was silent communication between Vedanta and Devayani, which meant I do not want words. 

 Storyteller – Sudhir Singh Gaur

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