दोस्ती (Friendship)

किशोरावस्था में बच्चे माता-पिता से धीरे धीरे दूर होते जाते हैं तथा उन्हें उनके साथी अच्छे लगने लगते हैं जिनका प्रभाव उनके व्यक्तित्व पर पड़ता है दोस्तों के विचारों से प्रभावित होते हैं दोस्त उनके निर्णयों को प्रभावित करते हैं उनके संपूर्ण क्रियाकलाप इन्हें प्रभावित करते हैं इस समय वे दो कदम आगे बढ़ते हैं तो एक कदम पीछे होते हैं अर्थात एक स्वतंत्र रूप से जीवन को जीने की इच्छा होती है वही दूसरी ओर माता-पिता का भी साथ चाहते हैं ऐसे समय में माता-पिता की बहुत बड़ी भूमिका होती है कि उनका बच्चा किस प्रकार के दोस्तों के साथ रहे या ना रहे वे इसका ध्यान रखे ।मैं एक बार पैरंट टीचर मीटिंग में गया था तब एक फिजिक्स के टीचर थे जो कह रहे थे की पेरेंट्स यदि चाहते हैं कि उनका बच्चा टॉप करें तो सबसे पहले शर्त यह है उसे अपने दोस्तों से दूर कर दो लेकिन मैं उस वक्त कंफ्यूज था शिक्षक सही बोल रहे हैं गलत फिर बहुत दिनों बाद मुझे ऐसा लगा कि शायद वह इसलिए ऐसा कह रहे थे यदि खराब दोस्त मिल जाए तो फिर जिंदगी बर्बाद हो जाती है और अच्छे दोस्त मिल जाए तो जीवन को एक नई दिशा मिल जाती है अर्थात रिस्क है इसलिए पेरेंट्स को कोई रिस्क नहीं उठाना चाहिए लेकिन फिर भी मैं कहूंगा दोस्त होना चाहिए, हां इस पर चर्चा कर सकते हैं कि दोस्तों की संख्या कितनी होनी चाहिए ? तो एक निष्कर्ष निकाला गया इस पर और वह निष्कर्ष यह है की अधिक से अधिक दो दोस्त होना चाहिए यदि आपके दो से अधिक दोस्त हैं तो समझ लीजिए आपको घर में प्यार नहीं मिल रहा है और आप प्यार की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं इसलिए अधिक दोस्त जब रहेंगे तो आपका माइंड ज्यादा भरा रहेगा और यह संबंधों का विस्तार दुख का कारण बनता है जितने ज्यादा दोस्त रहेंगे उतने ज्यादा विचार उसने ज्यादा सिद्धांत आपको परेशान कर सकते हैं और आप लक्ष्य से भटक सकते हैं ।अब प्रश्न उठता है कि वह दोस्त कैसे चुने आपकी रुचि जिन चीजों में है उनकी भी रुचि उन चीजों में हो तो ऐसे दोस्त सोने में सुहागा कहलाएंगे । जो दोस्त नॉलेज प्राप्त करने की बात करते हो जिन दोस्तों का लक्ष्य निर्धारित है कि उन्हें आगे जाकर क्या बनना है ,जो दोस्त ऑल राउंडर भी हो अर्थात पढ़ाई खेल नॉलेज में बराबर बराबर की रूचि हो ।किस माहौल में रहते हैं हमें इसका पता लगाना चाहिए जिससे कि हमें आगे बढ़ने में कोई खतरा नहीं होगा वैसे यदि देखा जाए जो लोग बहुत आगे बढ़े हैं उनके दोस्त बहुत कम होते हैं और बहुत हद तक देखा जाए तो उनके दोस्त होते ही नहीं उदाहरण के लिए महात्मा गांधी उनके किसी दोस्त का पता नहीं लगता । ऐसे अनेक उदाहरण मिलेंगे जहां महान लोगों के दोस्त नहीं होते फिर भी वह महान बनते हैं अर्थात यह आपको निर्णय लेना है कि आपके दोस्त हो या नहीं हो क्योंकि कभी-कभी दोस्त शत्रु भी बन जाते हैं और जब दोस्त शत्रु बनते हैं तो वह भयानक शत्रु बनते हैं इसलिए हमें दोस्त चुनते वक्त सावधानी बरतना चाहिए यदि अच्छे दोस्त मिलते हैं तो आपके सुख दुख में के साथ दे सकते हैं और आपकी लाइफ बनाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है

In adolescence, children gradually move away from parents and they like their partners, which have an impact on their personality. Friends are influenced by the thoughts of friends. Their influences affect their decisions. At the time when they move two steps forward, they are one step behind, that is, one wishes to live life independently, on the other hand, parents also want to be together, in such a time, parents have a big role to play. They should take care of what kind of friends the child is with or not. I once went to a parent teacher meeting, then there was a physics teacher who was saying that if parents want their child to be the top, then the first condition is Let’s make him away from his friends, but I was confused at that time. The teacher is saying right or Wrong then after a long time I thought that maybe, he was saying that if a bad friend is found then life is ruined and good friends. If found, life gets a new direction, that is risk, so parents No risk should be raised, but still I would say there should be friends, yes we can discuss what should be the number of friends? So there was a conclusion on this and that conclusion is that there should not be more than two friends. If you have more than two friends, then understand that you are not finding love in the house and you are wandering from one to the other in search of love. So when more friends are there, your mind will be more full and this expansion of the relationship causes sorrow, the more thoughts the more friends will be, the more principles can disturb you and you may deviate from the goal. Now the question arises that How to choose a friend, if you are interested in the things that are interested in those things, then such friends will be called icing on the cake. Friends who talk about getting knowledge, friends whose goal is to determine what they want to become in the future, friends who are all-rounders, that is, they have equal interest in learning sports, knowledge. In which environment we live, we should find it out. So that there will be no danger in us moving forward, if we see that the people who have progressed very well their friends are very few and if seen to a great extent, then they have not friends at all, for example Mahatma Gandhi does not know of any of his friends. . There will be many instances where great people do not have friends, yet they become great, that is, you have to decide whether you are friends or not because sometimes friends become enemies and when friends become enemies, they become terrible enemies. So we should be careful while choosing friends, if you get good friends then you can give your happiness with sorrow and they can be an important contributor in making your life.

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