यौन शिक्षा Sex education

ऋषि वात्सायन ने लगभग 2000 वर्ष पूर्व कामसूत्र लिखा था ,इसके पीछे उनका वैज्ञानिक दृष्टिकोण था, बाद में कलाकारों ने इन्हें अजंता, एलोरा खजुराहो ,कोणार्क मंदिर पर चित्र और शिल्प कला के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया. इससे उस वक्त के समाज की सोच का पता लगता है कि कितना सभ्य और आधुनिक समाज रहा होगा. वास्तव में पूरे विश्व में कामसूत्र को स्वीकार किया गया .जिंदगी का अत्यंत महत्वपूर्ण विषय होते हुए भी सबसे कम चर्चा इस पर होती है. कुछ विचारक ऐसा कहते हैं जहां शिक्षा का स्तर और साक्षरता का प्रतिशत ठीक न हो वहां सेक्स एजुकेशन की बात करना बेमानी होगा. फिर भी हमें आशावादी बनना होगा .

डब्ल्यूएचओ के अनुसार किशोरावस्था 10 से 19 वर्ष के बीच होती है . कुछ दिनों पूर्व एक स्कूल की प्रिंसिपल ने मुलाकात के दौरान मुझे बताया कि उनके स्कूल की कक्षा दो की छात्रा को मासिक धर्म की शुरुआत हो गई थी. ऐसी अवस्था में सेक्स एजुकेशन अनिवार्य लगता है. किशोरावस्था के दौरान शारीरिक एवं भावनात्मक परिवर्तन होते हैं ऐसे में उन्हें सही ज्ञान की आवश्यकता होती है जिससे कि उनका सही विकास हो सके. किशोरावस्था के दौरान कई प्रकार की समस्याएं आती है ,जैसे संवेगात्मक समस्या, सामाजिक समस्याएं , सेक्स समस्याएं लिंगिय समस्याएं, समायोजन समस्याएं, औषध तथा मादक दुरुपयोग, अपराध की समस्या, आर्थिक समस्या तथा मानसिक स्वास्थ्य की समस्या. जहां विश्व के अनेक हिस्सों में सेक्स एजुकेशन को स्वीकार्यता है वहीं भारत में यह कार्य चुनौतीपूर्ण है इसके अनेक कारण हैं जैसे सांस्कृतिक सामाजिक भाषा धर्म आदि . हम इसे नाम बदलकर पढ़ा सकते हैं जैसे शरीर विज्ञान या पारिवारिक स्वास्थ्य विज्ञान इसके अनेक लाभ हैं हम यह सिखा सकते हैं कि ऑपोजिट सेक्स के प्रति आदर करें और उनसे अच्छा व्यवहार करें इससे समाज में होने वाले बलात्कार तथा ऐसे ही अपराधों में कमी आ सकती है ।

हम किशोरों को सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डिजीज के बारे में अवगत करा सकते हैं जैसे लड़कियों को असमय गर्भधारण के खतरों के प्रति आगाह कर सकते हैं। अपराधों की सजा के प्रावधानों के बारे में समझा सकते हैं। हम सेक्सुअल बीमारियों के बारे में बता सकते हैं, रीप्रोडक्टिव प्रोसेस को समझा सकते हैं छोटी कक्षाओं में गुड टच तथा बेड टच के बारे में समझा सकते हैं । मेरा ऐसा मानना है कि यदि स्वस्थ समाज बनाना है तो सेक्स एजुकेशन अनिवार्य करना होगा व्हाट हाउ और व्हेन के प्रयोग कर मानसिक रूप से हम किशोर तथा किशोरियों को मजबूत बना सकते हैं तभी एक स्वस्थ देश की कल्पना की जा सकती है इसमें पैरंट टीचर और काउंसेलर अपनी विशेष भूमिका निभा सकते हैं।

Rishi Vatsyayan wrote Kamasutra about 2000 years ago, his scientific approach was behind it, later artists tried to make it accessible to the common people through paintings and crafts on Ajanta, Ellora Khajuraho, Konark temple. This reflects the thinking of the society of that time, how civilized and modern society must have been. In fact, Kamasutra was accepted all over the world. Despite being a very important subject in life, the least discussion is on it. Some thinkers say that it would be meaningless to talk about sex education where the level of education and percentage of literacy is not adequate. Still, we have to be optimistic.

According to the WHO, adolescence age is between 10 and 19 years old. A few days ago a school principal told me during a meeting that a student of class two of her school had started menstruating. In such a situation, sex education seems to be mandatory. Physical and emotional changes occur during adolescence, in which they need correct knowledge so that they can develop properly. Many types of problems occur during adolescence, such as emotional problems, social problems, sex problems, gender problems, adjustment problems, drug and abuse, crime problems, financial problems and mental health problems. While sex education is accepted in many parts of the world, in India, this work is challenging. There are many reasons for this, such as cultural ,social ,language, religion etc. We can teach it by changing the name like physiology or family health science. It has many benefits. We can teach that respect for opposite sex and to treat them well, it can reduce the rape and similar crimes in the society.

We can make teenagers aware of sexually transmitted diseases, such as warning girls against the dangers of premature pregnancy. Can explain the provisions of punishment for crimes. We can tell about sexual diseases, explain the reproductive process, good touch and bed touch in small classes. I believe that if we want to build a healthy society, sex education will have to be made compulsory by using what how and when we can mentally strengthen teenagers and adolescent girls, only then a healthy country can be imagined in it as a parent teacher and counselor. Can play its special role.

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