हार्टफुलनेस मैगजीन जनवरी 2021 की समीक्षा

एक बार फिर हार्टफुलनेस मैगजीन की समीक्षा का शुभ अवसर है। संपादकीय से स्पष्ट है कि यह अंक नव वर्ष में चुनौतियां का सामना कैसे करें इसके लिए साधन प्रस्तुत करेगी । सर्वप्रथम दीपक चोपड़ा चोपड़ा ने विश्व में शांति स्थापित करने में युवक की भूमिका के बारे में दाजी के साथ बातचीत की है। उसी बातचीत के अंश योग और शांति शीर्षक के अंतर्गत है । प्रत्येक चीज जिसे आप महसूस करते हैं और जो हृदय से उत्पन्न होती है वह पूरे आकाश काल में व्याप्त होती है ।यह शरीर के लिए मुख्य शक्ति दायक है । यदि कोई व्यक्ति हृदय पर ध्यान देता है, हृदय से ध्यान करता है ह्रदय के महत्व को समझता है या फिर ह्रदय को प्रेम ,करुणा, आनंद और समभाव के मूल स्थान के रूप में जानता है तो भी केवल वह अनुभूति ही हृदय की तरंगों के सामंजस्य को तुरंत बदल देती है। ह्रदय न केवल चेतना का बल्कि बुद्धिमत्ता का भी मूल स्थान है। और ह्रदय की बुद्धिमता, मस्तिष्क की बुद्धिमत्ता या किसी भी अन्य बुद्धिमता से श्रेष्ठतर है।

ध्यान करने की आदत डालिए —

संयुक्त राज्य अमेरिका में मेडिली फॉर्मेसिस के सह- संस्थापक और सीएमओ चिराग कुलकर्णी ध्यान को एक आदत बनाने के लिए ,ध्यान को नियमित रूप से करने के बारे में रिचिका शर्मा के साथ बात करते हुए यह भी बताते हैं कि ध्यान ने उनके व्यक्तिगत और व्यवसायिक जीवन को कैसे लाभ पहुंचाया, ध्यान से पहला फायदा यह हुआ कि धैर्य बढ़ने लगा ,दूसरा कार्य किया कि डायरी लिखना आरंभ किया, डायरी लिखने से फायदा हुआ कि वे बीते हुए समय के बारे में सोचकर यह विश्लेषण कर पा रहे हैं कि जब मैंने ध्यान शुरू किया तब मेरे विचार क्या थे, वे ध्यान के समय क्या महसूस करते थे और उसकी तुलना में मैं 3 महीने बाद 7 महीने बाद या 10 महीने बाद कैसा महसूस कर रहा था, मैंने अपने व्यवहार में भी थोड़ा सुधार महसूस किया।हार्टफुलनेस एक आध्यात्मिक पद्धति है। ध्यान ह्रदय से जुड़ने का सतत अभ्यास है और उसके परिणाम स्वरूप आप अपने निर्णय लेने में अपने ह्रदय से मार्गदर्शन ले पाते हैं। ध्यान से समानुभूति पूर्ण बनने में सहायता मिलती है । उनकी सलाह है कि बस एक कुर्सी पर बैठ जाइए और प्रयास कीजिए कुछ देर के लिए अपने हृदय पर ध्यान कीजिए और फिर देखिए कि आपको कैसा महसूस होता है।

संकट को अवसर में बदलना नेतृत्व की चुनौती

डॉक्टर इचक एडीजेस ने भाषण दिया था उसके अंश है ।मानव जाति के इतिहास में एक नया विकास हो रहा है । परिवर्तन तेजी से हो रहा है इस तेजी के परिणाम स्वरूप क्या हो रहा है ? विघटन भी तेजी से हो रहा है । मानव जाति के इतिहास में समस्याएं भी हमारे सामने पहले से कहीं अधिक तेजी से आ रही है । हमारे बुजुर्ग हमसे ज्यादा गरीब थे लेकिन वह अधिक सुखी थे । उनकी जिंदगी में तनाव कम था इस परिवर्तन के कारण जीवन स्तर में बहुत सुधार हो गया है लेकिन हमारे जीवन की गुणवत्ता घटती जा रही है । आधुनिक समय की सबसे तेजी से बढ़ती हुई मानसिक बीमारी अवसाद है , तलाक की दर को देखें, जितना ज्यादा विकसित देश है जिसका मतलब है ज्यादा बदलाव उतनी ही ज्यादा तलाक की दर है, तो हम क्या करें ? क्योंकि हम परिवर्तन को रोक नहीं सकते इसलिए हमें सीखना पड़ेगा कि हम एकीकरण कैसे करें । यही हल है यदि सभी समस्याएं विघटन से उत्पन्न होती है तो हल एकीकरण में है । यह दुख की बात है कि कुछ विश्वविद्यालय अब जाकर यह सिखाना शुरू कर रहे हैं कि परिवर्तन को कैसे संभाला जाए । यह सबसे महत्वपूर्ण विषय जो एक कार्यकारी के लिए जानना जरूरी है ।आपको परिवर्तन का नेतृत्व करना है इसलिए आपको पता होना चाहिए कि आपको उसे कैसे संभालना है।

ह्रदयपूर्ण नव प्रवर्तक भाग 1

यह एक नई श्रंखला आरंभ हो रही है जिसके पहले लेख में रवि वेंकटेशन यह समझने में हमारी सहायता करते हैं कि नवप्रवर्तन (innovation ) क्या है ? यह रचनात्मकता से कैसे अलग है और परिवर्तनशील बनने के लिए हमें किस चीज पर ध्यान देना चाहिए ।आज के इस आधुनिक दौर में स्टार्टअप यानी नई संस्थाओं को सर्वाधिक नवप्रवर्तनशील संस्थानों में माना जाता है विशेष रूप से जो प्रौद्योगिकी क्षेत्र में इनमें से कुछ ही नवप्रवर्तनशील कंपनियां यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल कर पाती है ।एलिन ली ने सन 2013 में एक अरब डॉलर का मूल्यांकन प्राप्त करने वाली कंपनियों को वर्णित करने करने के लिए इस शब्द की रचना की थी। किसी कंपनी के लिए यह दर्जा प्राप्त करने की संभावना 0.6% होती है मैं ऐसी दुर्लभ कंपनियों में से एक के लिए नवप्रवर्तन विभाग का नेतृत्व करता हूं और मैंने अपने व्यावसायिक जीवन के 20 वर्ष विभिन्न संगठनों में किसी न किसी प्रकार के नवप्रवर्तन के नेतृत्व की भूमिका में बिताए है ।इन वर्षोँ में एकत्रित किए अपने कुछ बेहतरीन विचारों को मैं इन लेखों की श्रंखला में आपके साथ बाटना चाहूंगा ।जैसे जैसे हम नवप्रवर्तन को गहराई से समझने की कोशिश करते हैं यह समझना महत्वपूर्ण होता जाता है कि यह रचनात्मकता से कैसे अलग है। एक कलाकार जो एक अद्भुत कलाकृति बनाती है वह बहुत रचनात्मक है और वह अपनी रचनात्मकता को अभिव्यक्त करती है लेकिन यह जरूरी नहीं कि वह नवप्रवर्तनशील हो। वही एक व्यक्ति जो धातु के ऑक्साइड के पाउडर से कांच को रंगने के तरीके की खोज करता है जिससे कांच रंगीन बन जाए ,हो सकता है कि वह रचनात्मक ना हो लेकिन निश्चित रूप से नवप्रवर्तनशील हो ।परिवर्तन के कारण हमें काम करने के नए तरीके तथा नए उत्पाद और सेवाएं प्राप्त होती है यहां तक कि मनुष्य के रूप में इस दुनिया के हमारे अनुभव में अनेक नए पहलू भी जुड़ जाते है ।दूसरा अंतर यह कि जहां रचनात्मकता एक व्यक्तिगत विशेषता है वही नवप्रवर्तन आमतौर पर सहभागिता और कई विचारों के साथ जुड़ने का परिणाम होता है ।

संगीत का ध्वनि का वातावरण भाग 1

शुभेंद्र राव और सारिस्कया राव डे हास ने भी श्रीनिवासन के साथ बात करते हुए संगीत के क्षेत्र में ,अपने व्यावसायिक जीवन शिक्षा के क्षेत्र में, संगीत के महत्व और जीवन में स्पंदन अनुनाद सामंजस्य और लय के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। यहां वे संगीत का अर्थ समझाने से वार्ता आरंभ कर रहे हैं ।सस्किया कहती है कि जब वे गर्भवती थी तो वायलिनचेलो बजाने का रोज अभ्यास करती थी ।इसका प्रभाव यह हुआ कि उनके बच्चे ने 8 माह की अवस्था में ही बोलना आरंभ कर दिया था ।डेढ़ वर्ष की आयु में वह 3 भाषाएं बोल लेता था। और 2 वर्ष की उम्र में वह लिखना, पढ़ना भी सीख गया था । स्पष्ट रूप से संगीत का उस पर प्रभाव पड़ा यहां तक कि उनका डॉग अर्थात कुत्ता जो कि उसके पास 3 वर्षो से था, वह कभी नहीं भौंकता था ,बहुत शांत है ,शुभेन्द्रू कहते हैं कि संगीत ध्यान है ।ध्यान अपने मन से सब कुछ निकाल देना और अपने आप को खाली कर देना है । संगीत ध्यान ही है। यह किसी एक बिंदु पर ध्यान केंद्रित करता है जहां आपकी समस्त ऊर्जा और सब कुछ उस बिंदु का अनुभव करने में लग जाता है। एक संगीतज्ञ के रूप में हम भी यही करते हैं इस प्रकार संगीत ध्यान की तरह नहीं बल्कि संगीत ध्यान ही है।

हमारी स्मृति और पावन धरती

लेवलीन वान ली हमारे पृथ्वी के साथ अपने जुड़ाव को भूल जाने पर खेद व्यक्त करता है और हमें एक बार फिर से अपने जीवन में उस रिश्ते की पवित्रता का स्मरण करने ,उसके साथ पुनः जुड़ने और फिर से जागृत करने के लिए आमंत्रित करते हैं । मुझे भी लगता है कि रात में जहां पेड़ों की पत्तियों को हाथ लगाना पाप समझा जाता था वहीं आज रात में पेड़ों को धड़ल्ले से काटा जा रहा है। मानव की इस पर्यावरणीय सोच में जो परिवर्तन आया है वह चिंता और चिंतन दोनों पैदा करता है ।हम अभी तक नहीं समझ पा रहे हैं कि हमारी सामूहिक चेतना भी इस धरती को प्रभावित करती है। प्राचीन संस्कृतिया यह सोचती थी कि यह धरती आध्यात्मिक, चमत्कारीक और भौतिक रूप से जीवंत है। और वह इसके साथ सामंजस्य में रहती थी ।मानव ने पेड़ों ,नदियों ,धरती ,सूरज ,चांद की पूजा की फिर उसे अपनी कला के माध्यम से मंदिरों के पत्थरों पर उकेरा।अजंता ,एलोरा, खजुराहो और कोणार्क में जंगली सांड ,घोड़े ,हिरण और देवियों की प्रजनन क्षमता को उकेरा। इस प्रकार मानवीय चेतना और धरती की चेतना का मिलन हुआ। और दोनों ने एक दूसरे को पोषित किया ।इस प्रकार सदियों तक धरती और मानवता साथ-साथ विकसित होती रही, जब तक कि हमने धरती से अपने अलगाव की यात्रा शुरू नहीं कर दी। इस समय धरती के पवित्र स्वरूप को स्मरण करने का हमारा साधारण सा कार्य भी सहायक हो सकता है। हृदय का स्मरण हमेशा प्रेम ही होता है। प्रेम जीवन का महानतम उपहार है ।और यह जीवन को वापस दिया जाने वाला हमारा सर्वोत्तम उपहार है।

बाल निद्रा

अच्छी नींद के लिए मार्गदर्शिका डॉक्टर गरिमा गर्ग सेठ —जल्दी उठना और जल्दी सोना मानव को स्वस्थ संपन्न और बुद्धिमान बनाता है- बेंजामिन फ्रैंकलीन— बच्चों के शारीरिक विकास के लिए अच्छी नींद अत्यंत महत्वपूर्ण है अभिभावक कहते हैं कि उनके बच्चे रात को 12:00 या 1:00 बजे तक नहीं सोते कुछ लोग इस बात को गर्व से महसूस करते हैं और खुश होते हैं जबकि कुछ चिंतित रहते हैं। जिस घर के सदस्यों को अच्छी तरह आराम मिलता है सामान्यता उस घर में ज्यादा खुशियां होती है ।उम्र के अनुसार एक बच्चे को 24 घंटे में कितनी नींद की आवश्यकता होती है इसके लिए अमेरिकन अकैडमी आफ स्लीप मेडिसिन द्वारा एक तालिका तैयार की गई है। नवजात शिशु से 3 माह तक -16 से 18 घंटे , 4 से 12 माह तक 12 से 16 घंटे ,1 से 2 वर्ष तक 11 से 14 घंटे ,3 से 5 वर्ष तक 10 से 13 घंटे, 6 से 12 वर्ष तक 9 से 12 घंटे ,और 13 से 18 वर्ष तक के लोगों के लिए 8 से 10 घंटे सोना जरूरी है। वह कौन से संकेत है जिससे पता चलता है कि हमारे बच्चों को पर्याप्त नींद नहीं मिल रही है । सीखने में कठिनाई ,एकाग्र चित्त न हो पाना, चीजों को याद रखने में समस्या ,अति सक्रियता ,कमजोर मानसिक स्वास्थ्य ,व्यवहार संबंधी समस्याएं ,सिर दर्द ,प्रतिरोधक तंत्र की कार्य क्षमता में कमी, वजन बढ़ना और शारीरिक विकास संबंधी समस्याएं ,बड़े बच्चों में मोटापा ,उच्च रक्तचाप अवसाद आदि। सलाह दी जाती है कि रोज बच्चे व्यायाम करें, कैफीन का सेवन ना करें, शाम के समय भारी भोजन न करें ,सोने से संबंधित नियमितता बरतें, बच्चों को रोज गले लगाए।रोज लोरी सुनाए, शुभरात्रि कहे,प्रिय खिलौने गुड़िया कंबल आदि को भी उसके साथ अपने आलिंगन में शामिल करें, यह सहायक का काम करता है और बच्चे इसमें सुरक्षित महसूस करते हैं ,तितली जैसे कोमल चुंबन और एक प्यारे से गहरे आलिंगन में नन्हे बच्चे तुझे गहरी नींद आ जाए जैसे लोरी गा सकते हैं ।

जिससे आप वाकई मोहब्बत करते हैं उसके अनोखे खिंचाव से खुद को खामोशी से खींचने दे यह आपको भटकने नहीं देगा –रूमी

आदतें छोड़ने और विकसित करने की कला भाग 1

हम एक विचार बोते हैं और एक कर्म प्राप्त करते है । हम एक कर्म बोते हैं और एक आदत प्राप्त करते हैं ।हम एक आदत बोते हैं और चरित्र प्राप्त करते हैं ।हम चरित्र बोलते हैं और नियति प्राप्त करते हैं ।दाजी योग के ज्ञान को उन तरीकों से जोड़ रहे हैं जो हमारे व्यवहार व आदत बदल सकते हैं ।वह हमें सोचने और महसूस करने के तरीकों का मूल्यांकन करने के लिए कहते हैं ताकि हमारी प्रवृतियां परिष्कृत हो और हम अपनी जीवनशैली को श्रेष्ठ वह अच्छी बनाने की कोशिश करें ।महान ऋषि पतंजलि ने यम और नियम के अभ्यास के महत्व को प्रस्तुत किया था जो अष्टांग योग के पहले दो अंग है । इन दोनों अभ्यासो के पीछे का विचार वास्तव में बहुत सरल है ,गलत भावनाओं व विचारों को त्यागना यम है, यम का अर्थ है त्यागना ,वास्तविकता जानने की चाहत और वास्तविकता के बारे में सोचना नियम है, यम का अर्थ है उपहार ना लेना ,चोरी न करना, झूठ ना बोलना ,आदि, याम हृदय से अनचाही चीजों को निकाल देना है जबकि नियम हृदय में आवश्यक गुणों को डालना है ।दूसरे शब्दों में कुछ विशेष विचार भावनाएं और आदतें हमें ईमानदारी का जीवन जीने के लिए प्रेरित करती है और अन्य हमें उससे दूर ले जाती है। हमारा उद्देश्य उन अनचाही आदतों को छोड़ना है जो हमें उससे दूर ले जाती है और विकासपरक आदतों को विकसित करना जो हमें ईमानदारी की ओर प्रेरित करती है। किसी भी शानदार फिल्म या महान उपन्यास का प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि उसका अंत कैसे होता है ,अच्छाई बुराई पर कैसे हावी होती है चरित्र का बहुत महत्व होता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता क्या आप बढ़ाना चाहते स्वाति थोड़ा

अच्छी साफ सफाई की आदतों का पालन करना, सही समय पर सही मात्रा में पौष्टिक भोजन खाना, उचित रूप से व्यायाम करना, शराब धूम्रपान एवं नशे की आदतों से दूर रहना ,सही वजन बनाए रखना, सही समय पर आराम करना और सोना, तनाव को कम करना, विटामिन सी विटामिन ई विटामिन ए omega-3 का सेवन करना।

सार

जैसा की संपादकीय में लिखा है की 2021 का वर्ष चुनौतियों का वर्ष रहेगा तो हम किस प्रकार से उन चुनौतियों का सामना करें जिससे कि हम अपना जीवन शांति तथा सुखमय रूप से जी सके इसी के साधन इस पत्रिका में बताए हैं।संपादक मंडल, लेखकों और साधको को साधुवाद।

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