मनोविदलता Schizophrenia

मनोविदलता असामान्य व्यवहारों का वह समूह है जिसमें रोगी की वास्तविकता के साथ संबंध स्थापित करने की योग्यता तथा उसकी संवेदनात्मक

एवं प्रतिक्रियाओं में आधारभूत विकृति उत्पन्न हो जाती है मनोविदलता में रोगी का वास्तविक से संपर्क टूट जाता है। सन 1896 में कैपलिन ने सर्वप्रथम इस रोग के बारे में जानकारी दी थी और इसे डिमेंशिया परेकोकस का नाम दिया था। जिसका मतलब होता है समय से पहले मानसिक क्रियाओं का बिगड़ना। मनोविदलता एक लंबे समय तक रहने वाला मनोरोग है जिसमें व्यक्ति के मानसिक कार्यों में बाधा पड़ने से व्यक्तित्व अव्यवस्थित हो जाता है ।इसके लक्षण व्यक्ति के व्यवहार सोच एवं भाव में परिवर्तन लाते हैं प्रति 10000 व्यक्तियों में एक या दो लोग इस रोग से प्रभावित होते हैं यह रोग किसी भी आयु के व्यक्ति को हो सकता है लेकिन यह अधिकतर 15 वर्ष से 20 वर्ष की आयु के लोगों में शुरू होता है। पुरुष और महिलाएं इस रोग से समान रूप से प्रभावित होते हैं , परंतु निम्न आय वर्ग और अल्प बुद्धि के लोग इससे अधिक प्रभावित होते हैं । अस्पतालों में मनोरोग विभागों में इस रोग से पीड़ित व्यक्तियों की संख्या सबसे अधिक होती है। यह रोग बड़े बच्चों, बाएं हाथ से लिखने वालों , सर्दियों में जन्मे व्यक्ति में अधिक होता है। इस बीमारी के कारणों की सही-सही जानकारी नहीं है। ऐसा माना जाता है कि यह रोग कई कारणों से उत्पन्न होता है जिसमें अनुवांशिक व वातावरणीय कारणों का बराबर योगदान है। जुड़वा बच्चों में इसकी

व्यापकता 6% है, तथा इस रोग से पीड़ित लोगों के रिश्तेदारों में इसकी व्यापकता 10 से 45% के बीच है ।अनेक जीन इस बीमारी के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं ।मनोविदलता से पीड़ित अभिभावकों के बच्चों में इसकी व्यापकता 10 से 13% है। जैव रासायनिक सिद्धांत के अनुसार मस्तिष्क में डोपामिन की मात्रा बढ़ जाने से मनोविदलता उत्पन्न होती है।सीरोटोनिन तथा nauripinephrin की कमी भी

मनोविदिलता के लिए जिम्मेदार होती है ।मनोविश्लेषकों के अनुसार यह रोग व्यक्ति के विकास को उल्टा कर देता है जिससे उसका सोचना, महसूस करना, व व्यवहार बच्चों की तरह हो जाता है , वह उलझन भरी व दर्दनाक वास्तविकता ओं को सहन नहीं कर पाता तथा अपनी काल्पनिक दुनिया में खो जाता है। इस रोग के लक्षण:– 1) व्यक्तित्व तथा प्रवृत्ति में परिवर्तन 2)भद्दा, झक्की,व अनुचित व्यवहार, अनुचित शक,या वहम 3 ) भाव तीव्रता में कमी, भाव हीनता बिलावजह रोना या हँसना, 4 ) कामकाज की आदतों में परिवर्तन, कार्य की अवहेलना, कार्यकुशलता तथा उत्पादकता में कमी ,5) शारीरिक स्वच्छता की अवहेलना, 6) अनुचित मौन धारण कर लेना, अपने आप से बातचीत करना, 7) अचानक और अस्पष्ट और असीमित रूप से धर्म ,दर्शन शास्त्र, लिंग या राजनीति में रुचि, 8) दृष्टि श्रवण या सूंघने का विभ्रम, 9) अधिक तनाव ,घंटों तक एक स्थान पर बैठे या खड़े रहना, विरोध करना, इत्यादि ।मनोविदलता के उपचार से संबंधित कुछ सावधानियां 1) ध्यान रहे रोग का कारण भूत प्रेत, उपरी साया, बुरी हवा मौसम या देवी देवता इत्यादि नहीं होते है, 2) रोग के लक्षणों की समय पर पहचान आवश्यक है सभी प्रकार की मनोविदिलता के लक्षण एक जैसे नहीं होते , 3)तांत्रिक, साधु संत, मौलवी, वैद्य हकीम व अन्य डाक्टरों के पास ना जाकर तुरंत मनोरोग चिकित्सक की सलाह लें।4) रोगी को प्रताड़ित करना ,भूखा रखना, बांधना, डांटना पीटना या झाड़-फूंक कराना इसका उपचार नहीं है। 5) दवाओं को उनका प्रभाव शुरू होने से पहले ना बदले और ना ही उनका प्रयोग बंद करें. 6) सिक्स बिजली का इलाज इस रुप का अंतिम इलाज या घातक इलाज नहीं है। 7)रोगी का उपचार मनोरोग चिकित्सक की सलाह के बिना कभी बंद ना करें साथ रोगी को नौकरी पर जाने या और कोई व्यवसाय करने के लिए तब तक ना कहे जब तक मनोरोग चिकित्सक इसकी सलाह ना दें 8) रोगी का विवाह इस रोग का इलाज नहीं है यदि विवाह करना हो तो उस परिवार में करें जिसके किसी सदस्य में इस तरह का रोग ना हुआ हो 9) रोगी को न तो अत्यधिक डांटे ना ही उसकी बुराई करें और ना ही उसके लिए अत्यधिक संरक्षणशील बने. 10 )इस रोग का इलाज केवल मनोरोग चिकित्सालय में ही नहीं बल्कि लगभग सभी अस्पतालों में उपलब्ध है.

Psychosis is a group of abnormal behaviors in which the patient’s ability to relate to reality and its sensory

And in the reactions a basic distortion occurs, in psychosis, the patient’s contact with the real is lost.  In 1896, Caplin first gave information about the disease and named it Dementia Perecoccus.  Which means premature deterioration of mental activity.  Psychosis is a long-lived psychopath in which the personality is disturbed due to obstruction in the mental functions of the person. Its symptoms change the behavior, thinking and emotions of the person. One or two people per 10,000 people are affected by this disease.  This disease can happen to a person of any age, but it mostly starts in people between 15 and 20 years of age.  Men and women are affected equally by this disease, but people of lower income group and low intelligence are more affected by it.  Psychiatric departments in hospitals have the highest number of people suffering from this disease.  The disease is more common in older children, left-handed writers, and those born in winter.  The exact cause of this disease is not known.  It is believed that the disease arises due to many reasons in which genetic and environmental causes contribute equally.  Its in twins

The prevalence is 6%, and its prevalence is between 10 and 45% among relatives of people suffering from the disease. Many genes have been found to be responsible for the disease. Its prevalence is 10 to 13% among children of parents with dementia.  According to biochemical theory, psychopathy is produced due to increased amount of dopamine in the brain. There is also a deficiency of serotonin and nauripinephrin.

It is responsible for psychosis. According to psychoanalysts, this disease turns a person’s development upside down which causes him to think, feel, and behave like children, he cannot bear the confusing and painful reality.  Is lost in the fantasy world.  Symptoms of this disease: – 1) Changes in personality and instincts 2) Lewd, frisky, and inappropriate behavior, inappropriate doubt, or anxiety 3) Loss of emotion intensity, feeling weak, crying or laughing, 4) Changes in working habits  , Disregard of work, loss of efficiency and productivity, 5) disregard for physical hygiene, 6) holding inappropriate silence, talking to oneself, 7) suddenly and vaguely and infinitely in religion, philosophy, gender or politics  Interest, 8) hearing loss or sniffing, 9) high tension, sitting or standing in one place for hours, resisting, etc. Some precautions related to the treatment of dementia 1) Beware of the cause of disease, ghosts, upper shadow  There is no bad wind, weather or deity etc., 2) Timely identification of the symptoms of the disease is necessary. All types of psychosis are not the same, 3) Tantrik, saint, maulvi, vaidya hakim and other doctors have  Do not go and seek the advice of a psychiatric doctor immediately. 4) Harassing, starving, tying, scolding, beating or chanting the patient is not a cure for it.  5) Do not change or stop use of medicines before they start their effect.  6) The treatment of electricity is not the ultimate cure or fatal cure for this form.  7) Never stop the treatment of the patient without the advice of the psychiatrist. Do not ask the patient to go to work or do any other business unless the psychiatrist advises it. 8) The patient is not treated for this disease.  If you want to get married, do it in a family whose member has not had such disease 9) Do not scold the patient excessively or do evil to him nor be highly protective of him.  10) Treatment of this disease is not only available in psychiatric hospital but also in almost all hospitals.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: