हकलाहट

हर काल समय और देश में हकलाहट के दोष से ग्रस्त लोग मिलते हैं ।अरस्तु, डेमोंस्थनीज, चार्ल्स लैंब, मोजेज आदि लोग हकलाहट से ग्रस्त थे । हकलाहट पुरुषों में स्त्रियों की अपेक्षा कई गुना अधिक मिलती है । इस दोष से ग्रस्त व्यक्तियों में 90% में हकलाहट 6 वर्ष के पहले ही प्रारंभ हो जाती है। 2 से 4 वर्ष के बीच की आयु में इसके प्रारंभ होने की घटना अधिकतम है। अनेक व्यक्ति इसे वंशानुगत मानते हैं, क्योंकि हकलाने वाले पिता के बच्चों में इसका घटनाक्रम सबसे अधिक होता है , परंतु इसका कारण बच्चे द्वारा गलत व्यवहार का अनुकरण भी हो सकता है। बोलने की लय वह प्रवाह में बाधा को हकलाना कहते है ,जो समय पर रोक, शब्दों को बार-बार दोहराने अथवा ध्वनि, शब्द ,शब्दांश या वाक्य खंड के विस्तार के कारण होता है। हकलाने के कारण :-भावात्मक विकार ,जैसे परिवार में अशांति, माता-पिता व अध्यापकों द्वारा समालोचना या सख्त व्यवहार इत्यादि,मंदबुद्धि:- मंदबुद्धि बच्चों में वाणी का विकास धीरे-धीरे होता है तथा आम बच्चों की तुलना में यह बच्चे बोलना 1 से 3 वर्ष देर से सीखते हैं ।तालू में छेद:- कई बच्चे तालू में छेद की वजह से हकलाते हैं, इन्हें खाना खाने में कठिनाई होती है और उनके दांतो की बनावट में परिवर्तन आ जाता है ।सुनने की शक्ति में कमी:- जिन बच्चों में हकलाना अचानक प्रारंभ हो जाता है तथा काफी देर तक रहता है उनके सुनने की शक्ति की जांच जरूर करानी चाहिए । कम सुनने की वजह से बच्चा एक बात को बार-बार कहने का प्रयास करता है तथा जरूरत से ज्यादा ऊंचा बोलता है । हकलाना भी इसका एक विकार हो सकता है । जीभ के नीचे तालु :- लगभग 15 से 20% बच्चे इसी कारण से हकलाते हैं। माता-पिता स्वयं इस कारण का पता लगा सकते हैं। इस अवस्था में एक तो बच्चे तालू की जगह से जीभ मुंह से बाहर नहीं निकाल पाते दूसरे यदि जीभ के नीचे उंगली डालकर देखा जाए तो तालु का पता चल सकता है ।मस्तिष्क के दोनों हिस्सों में असंतुलन:- इस अवस्था में बच्चे में जन्म के साथ ही हकलाना शुरू हो जाता है तथा उम्र के साथ-साथ अपने आप ठीक ही हो जाता है। अन्य :- माता-पिता में तनाव, माता या पिता की अनुपस्थिति ,माता या पिता का बच्चे को उचित समय ना दे पाना , माता-पिता द्वारा बालकों की उपस्थिति में बालिकाओं की अवहेलना करना, परिवार में नए बच्चे का जन्म, इत्यादि ।अनेक बार माता-पिता नवजात शिशु की ओर अधिक ध्यान देने से बड़े बच्चों में हकलाने की समस्या उत्पन्न हो जाती है । 3 से 6 वर्ष के बच्चों में नवजात शिशु से स्पर्धा साधारण बात है इसकी पहचान कई रूप में हो सकती है। बच्चा माता-पिता का ध्यान आकर्षित करने के लिए कई तरीके अपनाता है जैसे हकलाना एवं बिस्तर गीला करना , यदि बड़े बच्चे से छोटे बच्चे की देखभाल में सहायता ली जाए तो इस इच्छा को समाप्त किया जा सकता है। माता-पिता द्वारा बच्चों का ध्यान रखना तथा उन्हें बोलते हुए टोकना उनके हकलाने का कारण बन सकता है ,उचित ध्यान न देने से बच्चों को यह लगता है कि माता-पिता के पास समय नहीं है , इस स्थिति में वह किसी भी बीमारी का बहाना बनाकर या उसे बढ़ा चढ़ाकर अपनी और माता-पिता का ध्यान आकर्षित करते हैं । जब यह आदत बन जाए तो उसे ठीक करना मुश्किल हो जाता है। बच्चों की पूरी बात सुने बिना उन्हें बीच में टोकने से बच्चे जल्दी-जल्दी बोलने की कोशिश करते हैं जिससे हकलाना पैदा हो जाता है। कभी यह ज्यादा अथवा और ज्यादा हो जाता है ।अन्य कारणों में हकलाने वाले बच्चे कई बार सिर में चोट लगने से , तेज बुखार से , मिर्गी रोग के कारण अथवा नींद, खांसी, मिर्गी या अवसाद रोक की दवाओं का सेवन अथवा किसी हकलाने वाले व्यक्ति की नकल करने से भी इस रोग का शिकार हो जाते हैं। यह भी देखा गया है कि हकलाना बोलकर पढ़ने, गाने व निर्जीव वस्तुओं या पालतू जानवरों से बातचीत करते समय नहीं होता बल्कि जल्दी बोलने, उत्तेजना के कारण तथा अपरिचितों से बातचीत करने में अधिक होता है । हकलाने की जटिलताएं केवल मरीज तक ही सीमित नहीं होती हकलाने वाले व्यक्ति उनके माता-पिता या निकट संबंधी तथा उनसे बातचीत करने वाले व्यक्ति भी जटिलताओं का शिकार हो सकते हैं । हकलाने से व्यक्ति के सामाजिक संबंधों को क्षति पहुंचती है। ऐसे व्यक्ति कार्यालय या कक्षा में शर्म की वजह से बातचीत नहीं करते तथा पिछड़ जाते हैं। समाज में बहिष्कृत व परेशान होने के कारण ऐसे लोग अपने आप को हीन समझते हैं जिससे घबराहट, डर, अवसाद जैसे रोग उत्पन्न हो जाते हैं ।इन व्यक्तियों में आत्महत्या भी एक प्रमुख समस्या बन सकती है। हकलाने से व्यक्तित्व में विकार उत्पन्न हो जाते हैं । इससे व्यक्ति मदिरा सेवन तथा तनाव से मुक्ति दिलाने वाली दवाओं का नशा भी करने लग सकता है। हकलाने वाले व्यक्ति के रिश्तेदार भी उस व्यक्ति की उपस्थिति में शर्म ,तनाव या हीन भावना से ग्रसित हो जाते हैं और अक्सर उसका बहिष्कार करने लग जाते हैं। हकलाने वाले व्यक्ति से वार्तालाप करने वाले व्यक्तियों में अधिक तनाव पाया जाता है । कुछ व्यक्तियों ने इसका कारण उस व्यक्ति के हकलाने पर हंसी को काबू में रखना या उसकी बातचीत को ध्यान से सुनना बताया है। कुछ व्यक्तियों ने बताया कि इस रोग का डर भी उनमें तनाव पैदा करने का एक मुख्य कारण था। उपचार:- जैसे ही व्यक्ति को हकलाने से परेशानी होने लगती है या यह अचानक अचानक शुरू हो जाती है या 3 वर्ष की आयु के बाद भी बनी रहती है तभी इसका इलाज करना जरूरी हो जाता है इसका उपचार प्राचीन काल से किया जाता रहा है। इस उपचार में हकलाने वाले व्यक्ति का इस आदत से ध्यान हटाना उसे आराम से बोलने का सुझाव देना प्रमुख है ।उपचार के तरीकों में हकलाने वाले व्यक्ति को धीरे धीरे एवं उंगली अथवा हाथ की ताल पद्धति के साथ बोलना सिखाया जाता है। धीरे-धीरे बोलने का मतलब एक एक अक्षर को साफ-साफ बोलने एवं धीरे से प्रारंभ करने व बोलने का प्रशिक्षण देना है। इसके साथ-साथ मुंह जबड़े वह गले की मांसपेशियों को शिथिल रखने का प्रशिक्षण दिया जाता है। उपचार का एक अन्य तरीका है, बायोफीडबैक, इस उपाय में वीडियो युक्त उपकरण होता है जिसमें व्यक्ति अपने हकलाते हुए वार्तालाप को स्वयं गौर से देखता है तथा हकलाने वाले शब्द वाक्य स्थितियों व अन्य तनावजन्य स्थितियों को देखकर लक्षणों को पहचानता है तथा उन्हें दूर करने का पुनः प्रयास करता है। डांटने, बुराई करने या मारने से इस बीमारी की रोकथाम नहीं की जा सकती। स्वयं उपचार तथा सामूहिक उपचार दोनों ही हकलाने वाले व्यक्तियों के इलाज में उपयोगी पाए जाते हैं। हकलाना एक लंबे समय तक रहने वाला रोग है जिसमें बीच-बीच में व्यक्ति सप्ताह या माह के लिए ठीक हो जाता है । 50 से 80% व्यक्ति किसी मनोवैज्ञानिक या वाणी चिकित्सक की सहायता से जल्दी ठीक हो जाते हैं ।माता-पिता को चाहिए यदि कोई बालक बिना कारण लगातार हकलाता है तो उसे जल्दी ही किसी मनोवैज्ञानिक के पास ले जाएं ताकि उसका जल्दी से उपचार हो सके और बालक को व्यक्तित्व संबंधी विकार से बचाया जा सके । यह बीमारी जितनी पुरानी होती जाती है उसका इलाज उतना ही कठिन हो जाता है।

Stuttering. :——People suffer from stuttering defects every time and country. People like Aristotle, Demonsthenes, Charles Lamb, Moses, etc. were suffering from stuttering.  Stuttering is found in men many times more than women.  In 90% of the people suffering from this defect, stuttering starts before 6 years.  The incidence of its onset is maximum between the age of 2 to 4 years.  Many people consider it to be hereditary, because its incidence is highest in the children of the stinging father, but it may also be due to the child’s misbehavior.  The rhythm of speaking is called obstruction of the flow, which is caused by stopping time, repeating words repeatedly or by extension of sound, word, syllable or sentence clause.  Causes of Stuttering: – Affective disorders, such as family disturbance, criticism or strict behavior by parents and teachers, etc., retard: – Speech develops more slowly in retarded children and this child speaks more than normal children 1.  3 years late learning. Hole in the palate: – Many children stutter due to a hole in the palate, they have difficulty in eating and change in their tooth texture. Decreased hearing power: – Children whose children  Stuttering starts suddenly and lasts long enough, their hearing power must be checked.  Because of hearing less, the child tries to say one thing over and over and speaks higher than necessary.  Stuttering can also be a disorder of it.  Palate under the tongue: – About 15 to 20% of children stutter for this reason.  Parents themselves can find out the reason.  In this stage, one child cannot take the tongue out of the mouth from the place of the palate, and if seen by putting a finger under the tongue, the palate can be detected. Imbalance in both parts of the brain: – In this stage with the birth of the child.  He starts stuttering and gets right on his own with age.  Others: – stress in parents, absence of mother or father, inability of parents or father to give proper time to child, parents disobeying girls in the presence of children, birth of new child in the family, etc.  The problem of stuttering in older children arises due to the frequent attention of the parents to the newborn.  Competition from the newborn in 3 to 6-year-olds is common, it can be identified in many ways.  The child adopts a number of methods to attract parents’ attention such as stuttering and bedwetting, this desire can be overcome if help is taken from the older child to care for the younger child.  Parents taking care of children and interrupting them can cause them to stutter, due to not paying proper attention to children, parents feel that they do not have time, in which case they can excuse any illness.  They attract their parents and attention by making or exaggerating it.  When it becomes a habit, it becomes difficult to cure it.  Without hearing the whole thing of the children, by interrupting them, the children try to speak quickly, which causes stutter.  Sometimes it becomes more or more. Children who are stammering due to other reasons are often due to head injury, high fever, epilepsy or due to sleep, cough, epilepsy or depression drugs or any person who is stuttering  By copying, they also fall victim to this disease.  It has also been observed that stuttering does not occur when reading aloud, singing and interacting with inanimate objects or pets, but more in speaking quickly, due to excitement and interacting with unfamiliar ones.  Complications of stammering are not limited to the patient only. Stammers can also suffer from complications from their parents or close relatives and those who interact with them.  Stuttering damages a person’s social relationships.  Such people do not talk in office or class because of shame and fall behind.  Due to being excluded and disturbed in the society, such people consider themselves inferior due to which diseases like nervousness, fear, depression arise. Suicides can also become a major problem in these people.  Stuttering causes personality disorders.  Due to this, a person may also start taking drugs and drugs to relieve stress.  Relatives of the stalker also suffer from shame, tension or inferiority in the presence of the person and often start to boycott him.  More stress is found in the person interacting with the stuttering person.  Some people have explained the reason for controlling laughter or listening to their conversation carefully.  Some people said that fear of this disease was also a main reason for causing stress in them.  Treatment: – As soon as a person starts having problems due to stuttering or it starts suddenly or continues even after 3 years of age, then it is necessary to treat it, it has been treated since ancient times.  In this treatment, it is important to remove the stuttering person from this habit and to suggest him to speak comfortably. Among the methods of treatment, the stutterer is taught to speak slowly and with the finger or hand rhythm method.  Speaking slowly means training each letter to speak clearly and starting slowly and speaking.  Along with this, training is given to keep the muscles of the mouth, jaw and throat at rest.  Another method of treatment, biofeedback, is a video-based tool in which a person watches their own stuttering conversation and recognizes the symptoms by looking at the stuttering word, sentence situations and other stressful situations and how to overcome them.  Tries again.  Scolding, doing evil, or killing cannot prevent the disease.  Both self-treatment and mass treatment are found useful in the treatment of stammers.  Stuttering is a long-lasting disease in which a person recovers intermittently for a week or month.  50 to 80% of people recover quickly with the help of a psychologist or speech therapist. Parents should take a child to a psychologist soon if he or she stutters without reason, so that he / she can be treated quickly and  The child can be protected from personality disorders.  The older the disease gets, the harder it becomes to treat.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: