मास्टर एवं शिक्षार्थी, Master and Learner

मास्टर की चार भूमिका होती है पहला मार्गदर्शक, दूसरा शिक्षक, तीसरा मित्र ,और चौथा दार्शनिक । मार्गदर्शक के रुप में गुरु शिक्षार्थी को प्रोत्साहित करते हैं ,कोचिंग करते हैं, सिखाते हैं ,और विचार प्रदान करते हैं । मास्टर शिक्षक के रूप में शिक्षार्थी को समृद्ध बनाता है, शिक्षा देता है ,और ज्ञान प्रदान करता है। मास्टर एक मित्र के रुप में शिक्षार्थी को सशक्त बनाता है, उस तक पहुंचता है और उसे आवश्यक सूचना तथा जानकारी देता है। मास्टर एक दार्शनिक रूप में शिक्षार्थी को निपुण बनाता है, उपदेश देता है और विभिन्न समस्याओं का समाधान करता है। एक अच्छे मास्टर को एक अच्छे शिक्षार्थी की तलाश सदैव होती है। जब तक उसे सुपात्र शिक्षार्थी नहीं मिलता तब तक वह अपना ज्ञान उसे नहीं देता है. उदाहरण के लिए रामकृष्ण परमहंस को स्वामी विवेकानंद की तलाश थी और जब स्वामी विवेकानंद रामकृष्ण परमहंस के जीवन में आए तब उन्होंने अपना सारा ज्ञान स्वामी विवेकानंद को दे दिया । शिक्षार्थी, समर्पण और निष्ठा के साथ विचारों को प्राप्त करता है और स्वीकार करता है। शिक्षार्थी ईमानदारी के साथ विचारों और उपदेशों को समझता है, और उसे अवशोषित ( Absorbs ) करता है। शिक्षार्थी अपने मास्टर से ज्ञान सूचना तथा समाधान प्राप्त करता है। शिक्षार्थी जो भी ज्ञान प्राप्त करता है उसे सबसे पहले समझता है और फिर अपने आप पर लागू करता है तथा उसके बाद अपने आप में सुधार करता है।

एकीकरण. ( Unification) कोई चीज ऐसी होती है जो मास्टर और शिक्षार्थी को जोड़ती है जिनमें प्रमुख, ज्ञान, जानकारी, सूचना और समस्याओं का समाधान ।ये सभी चीज़े दोनो के बीच एक जंक्शन का कार्य करती है। जब विचारों की जानकारी और समस्याओं का समाधान का संचरण दोनों के बीच होता है तब वे दोनों अपने भीतर मूल्य संवर्धन। (Values Addition ) करते हैं और इससे निरंतर अपने में सुधार करते हैं इस प्रकार एकीकृत होकर वे चेतना के स्तर पर पहुंच कर अच्छे समाज के निर्माण में सहयोग करते है । उच्च कोटि की प्रजा ही राष्ट्र को महान बनाने में सहायक होती है ।

The master has four roles: the first guide, the second teacher, the third friend, and the fourth philosopher.  As mentors, the Guru encourages the learner, coaching, teaching, and providing ideas.  The master enriches, educates, and imparts knowledge to the learner as a teacher.  The master empowers the learner as a friend, reaches out to him and gives him the necessary information and information.  The master makes the learner masterful in a philosophical manner, preaches and solves various problems.  A good master is always looking for a good learner, till he finds a good learner, he does not give his knowledge to him.  For example, Ramakrishna Paramahamsa was looking for Swami Vivekananda and when Swami Vivekananda came into the life of Ramakrishna Paramahamsa, he gave all his knowledge to Swami Vivekananda.  The learner receives and accepts ideas with dedication and loyalty.  The learner understands ideas and teachings with honesty, absorbs (Absorbs).  The learner receives knowledge, information and solutions from his master.  The learner first understands whatever knowledge is received and then applies it to himself and then improves himself.

Integration. (Unification) ……….There are some elements that connect the master and learner, they are mainly knowledge, information,ideas,solutions. These are the work of a junction among both. When the transmission of ideas and problems is between both of them , they both do value addition and improves itself, thus integrating them at the level of consciousness and cooperate in the creation of good society. The high quality citizens are helpful in making the nation great.

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