चार आशीर्वाद -चार क्षमताएँ !Four blessings – four abilities!

जब जानवर जमीन पर खड़ा हुआ, तो चार चीजें घटी ,उसके दो पैर अदृश्य हो गए तथा दो हाथ दिखलाई देने लगे, दूसरा उसकी एड़ी शक्तिशाली हो गई । क्योंकि मानव जब खड़ा होता है तो वह चार पैरों से नहीं,दो पैरों से खड़ा होता है। तीसरा उसका सिर बड़ा गया। चौथा, उसका ह्रदय मजबूत और विशाल बन गया। इस प्रकार हाथ ,एड़ी ,सिर और ह्रदय उसे आशीर्वाद के रूप में मिले । आदमी और जानवर में यही मुख्य अंतर है कि जब मानव अपने हाथ,एड़ी, सिर और हृदय का पूरा उपयोग करता है तो वह एक परिपक्व आदमी बन जाता है ।जब हम अपना हाथ थोड़ा सा भी उठाते हैं अर्थात जब हम अपना हाथ अच्छा कार्य करने के लिए उठाते हैं तब हम हार्ड वर्क और स्मार्ट वर्क कर सकते हैं। जब हम अपनी एड़ी उठाते हैं तो हम अपने एटीट्यूड और गति को ठीक कर सकते हैं। अच्छे एटीट्यूड और अच्छी गति से हम अपनी क्षमताओं का पूरा उपयोग कर सकते हैं। हम सिर उठाकर अपने अच्छे विचारों और आइडिया को पैदा कर सकते है ।हम अपने हृदय को विशाल कर प्रकृति और प्राणी जगत से प्यार कर सकते हैं। हम अच्छा कार्य करके अपने हाथों की क्षमता को बढ़ा सकते हैं। हम आगे बढ़ कर अपने एड़ी का पूरा उपयोग कर सकते है ।हम अच्छे विचारों को पैदा कर सकते हैं ।अच्छे आइडिया के बारे में सोच सकते हैं। अच्छे विजन को क्रिएट कर सकते हैं। इस प्रकार हम अपने सिर की क्षमता का पूरा उपयोग कर सकते हैं । हम प्यार करके, समानुभूति करके , हम अपने हृदय की क्षमता का पूरा उपयोग कर सकते हैं।

हमे प्रकृति ने आशीर्वाद के रूप में चार चीजें दी है हाथ, एड़ी ,सिर और ह्रदय। हम इनके अर्थात ,अपने कार्य , अपने एटीट्यूड,अपने आइडियाज ,अपने प्यार, अपने अनुभव, अपनी भावनाओं का पूरा उपयोग करके ईश्वर के प्रति कृतज्ञ हो सकते हैं ।

हाथ + एड़ी + सिर + हृदय = खुशियां,सामंजस्यपूर्ण, माननीय मानव

When the animal stood on the ground, four things happened, its two legs became invisible and two hands became visible, the other its heel became powerful.  Because when a human is standing, he stands not with four legs, but with two legs.  Third, his head was enlarged.  Fourth, his heart became strong and huge.  Thus the hands, heel, head and heart received him as a blessing.  The main difference between man and animal is that when a man makes full use of his hands, heel, head and heart, he becomes a mature man. When we raise our hands even a little, that is, when we do our hands to do good work.  Then we can do hard work and smart work.  When we lift our heel we can recover our attitude and speed.  With good attitude and good speed, we can make full use of our capabilities.  We can raise our head and cultivate our good thoughts and ideas. We can love nature and the living world by enlarging our heart.  We can increase the capacity of our hands by doing good work.  We can go ahead and make full use of our heels. We can generate good ideas. We can think of good ideas.  Can create good vision.  Thus we can make full use of our head capacity.  By loving, empathizing, we can make full use of our heart’s potential.

Nature has given us four things as blessings: hands, heels, head and heart.  We can be grateful to God by making full use of them, that is, our work, our attitude, our ideas, our love, our experiences, our feelings.

Hands + Heels + Head + Heart = Happiness, Harmonious, Honorable Human

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: