Messages of Major Religions

From the presentation at the Bangkok conference on Religion,conflict or peace ? Religion as spring board for generating inter ethnic and inter religious peace . All religions aim at evolving better human being.what is to be realised is that followers of any religion is believer.The concept of “believer of one particular religion is believer andContinue reading “Messages of Major Religions”

चार आशीर्वाद -चार क्षमताएँ !Four blessings – four abilities!

जब जानवर जमीन पर खड़ा हुआ, तो चार चीजें घटी ,उसके दो पैर अदृश्य हो गए तथा दो हाथ दिखलाई देने लगे, दूसरा उसकी एड़ी शक्तिशाली हो गई । क्योंकि मानव जब खड़ा होता है तो वह चार पैरों से नहीं,दो पैरों से खड़ा होता है। तीसरा उसका सिर बड़ा गया। चौथा, उसका ह्रदय मजबूतContinue reading “चार आशीर्वाद -चार क्षमताएँ !Four blessings – four abilities!”

चार ग्रहण- Four Eclipses

मानव ग्रहण : 1) देह ग्रहण उस वक्त होता है जब पूरा शरीर वासनाओं और आसक्ति से आच्छादित हो जाता है ।2) मनो ग्रहण उस वक्त होता है जब मन कामनाओं और तृष्णाओं से आच्छादित हो जाता है। 3) बुद्धि का ग्रहण उस वक्त होता है जब बुद्धि अज्ञान से आच्छादित हो जाती है ।4)Continue reading “चार ग्रहण- Four Eclipses”

मास्टर एवं शिक्षार्थी, Master and Learner

मास्टर की चार भूमिका होती है पहला मार्गदर्शक, दूसरा शिक्षक, तीसरा मित्र ,और चौथा दार्शनिक । मार्गदर्शक के रुप में गुरु शिक्षार्थी को प्रोत्साहित करते हैं ,कोचिंग करते हैं, सिखाते हैं ,और विचार प्रदान करते हैं । मास्टर शिक्षक के रूप में शिक्षार्थी को समृद्ध बनाता है, शिक्षा देता है ,और ज्ञान प्रदान करता है।Continue reading “मास्टर एवं शिक्षार्थी, Master and Learner”

जो दीपक की तरह जलने को तैयार हो (Ready to burn like a lamp)

गिरे हुओं को उठाना, पिछड़े हुओं को आगे बढ़ाना, भूले को रहा बताना और जो अशांत हो रहा है उसे शांतिदायक स्थान पर पहुंचा देना, यह वस्तुत: ईश्वर की सेवा ही है. जब हम दुखी और दरिद्र को देखकर व्यथित होते हैं और मलिनता को स्वच्छता में बदलने के लिए बढ़ते हैं तो समझना चाहिएContinue reading “जो दीपक की तरह जलने को तैयार हो (Ready to burn like a lamp)”

व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास की धुरी- “अध्यात्म”The axis of all-round development of personality – “Spirituality”

मनुष्य के व्यक्तिगत जीवन एवं मानव समाज में सुख शांति की परिस्थितियां किस आधार पर बनेगी इस प्रश्न का संक्षिप्त उत्तर दिया जाए तो वह होगा मनुष्य में मनुष्यता के विकास से । इसी को प्राचीन काल से व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास भी कह सकते हैं ।व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास का तात्पर्य मात्र शारीरिक स्वच्छताContinue reading “व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास की धुरी- “अध्यात्म”The axis of all-round development of personality – “Spirituality””

यह मूड क्यों ऑफ हो जाता है ? Why this mood gets off ?

आजकल एक नया रूप चला है उस रूप का नाम है मूड ऑफ होना। आधुनिक समय के सभ्य व शिक्षित कहे जाने वालों में प्राय: अधिकांश इससे ग्रसित हैं। उनको यह कहते हुए सुना जा सकता है कि आज तो अमुक काम कर ही नहीं सके, मूड ही नहीं हुआ क्या करें, आज तो ऑफिसContinue reading “यह मूड क्यों ऑफ हो जाता है ? Why this mood gets off ?”

“आत्महत्या”-अपराध या मनो विकृति “Suicide” – “Crime or Psychosis”

प्रत्येक व्यक्ति जीवित रहना चाहता है और अपने जीवन से प्यार करता है । वह उसकी सुरक्षा के लिए तरह तरह से साधन जुटाता है। मृत्यु से सभी को डर लगता है। हम लोग अनेक वीडियोस में देखते हैं कि सामने मौत आने पर पशु- पक्षी तक संघर्ष करने पर उतारू हो जाते हैं ,अर्थातContinue reading ““आत्महत्या”-अपराध या मनो विकृति “Suicide” – “Crime or Psychosis””

नव-सन्यास ( Neo – Sanyas)

एक सन्यास जो इस देश में हजारों वर्षों से प्रचलित है , जिससे हम सब भली भांति परिचित हैं। आपने घर परिवार छोड़ दिया , भगवा वस्त्र पहन लिए,चल पड़े जंगल की ओर, इस प्रकार का सन्यास तो लोगों के लिए त्याग का दूसरा नाम है , वास्तव मे तो यह जीवन से भगोड़ापन है,Continue reading “नव-सन्यास ( Neo – Sanyas)”

मनोविदलता Schizophrenia

मनोविदलता असामान्य व्यवहारों का वह समूह है जिसमें रोगी की वास्तविकता के साथ संबंध स्थापित करने की योग्यता तथा उसकी संवेदनात्मक एवं प्रतिक्रियाओं में आधारभूत विकृति उत्पन्न हो जाती है मनोविदलता में रोगी का वास्तविक से संपर्क टूट जाता है। सन 1896 में कैपलिन ने सर्वप्रथम इस रोग के बारे में जानकारी दी थी औरContinue reading “मनोविदलता Schizophrenia”