चार ग्रहण- Four Eclipses

मानव ग्रहण : 1) देह ग्रहण उस वक्त होता है जब पूरा शरीर वासनाओं और आसक्ति से आच्छादित हो जाता है ।2) मनो ग्रहण उस वक्त होता है जब मन कामनाओं और तृष्णाओं से आच्छादित हो जाता है। 3) बुद्धि का ग्रहण उस वक्त होता है जब बुद्धि अज्ञान से आच्छादित हो जाती है ।4)Continue reading “चार ग्रहण- Four Eclipses”

जो दीपक की तरह जलने को तैयार हो (Ready to burn like a lamp)

गिरे हुओं को उठाना, पिछड़े हुओं को आगे बढ़ाना, भूले को रहा बताना और जो अशांत हो रहा है उसे शांतिदायक स्थान पर पहुंचा देना, यह वस्तुत: ईश्वर की सेवा ही है. जब हम दुखी और दरिद्र को देखकर व्यथित होते हैं और मलिनता को स्वच्छता में बदलने के लिए बढ़ते हैं तो समझना चाहिएContinue reading “जो दीपक की तरह जलने को तैयार हो (Ready to burn like a lamp)”

व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास की धुरी- “अध्यात्म”The axis of all-round development of personality – “Spirituality”

मनुष्य के व्यक्तिगत जीवन एवं मानव समाज में सुख शांति की परिस्थितियां किस आधार पर बनेगी इस प्रश्न का संक्षिप्त उत्तर दिया जाए तो वह होगा मनुष्य में मनुष्यता के विकास से । इसी को प्राचीन काल से व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास भी कह सकते हैं ।व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास का तात्पर्य मात्र शारीरिक स्वच्छताContinue reading “व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास की धुरी- “अध्यात्म”The axis of all-round development of personality – “Spirituality””

यह मूड क्यों ऑफ हो जाता है ? Why this mood gets off ?

आजकल एक नया रूप चला है उस रूप का नाम है मूड ऑफ होना। आधुनिक समय के सभ्य व शिक्षित कहे जाने वालों में प्राय: अधिकांश इससे ग्रसित हैं। उनको यह कहते हुए सुना जा सकता है कि आज तो अमुक काम कर ही नहीं सके, मूड ही नहीं हुआ क्या करें, आज तो ऑफिसContinue reading “यह मूड क्यों ऑफ हो जाता है ? Why this mood gets off ?”

नव-सन्यास ( Neo – Sanyas)

एक सन्यास जो इस देश में हजारों वर्षों से प्रचलित है , जिससे हम सब भली भांति परिचित हैं। आपने घर परिवार छोड़ दिया , भगवा वस्त्र पहन लिए,चल पड़े जंगल की ओर, इस प्रकार का सन्यास तो लोगों के लिए त्याग का दूसरा नाम है , वास्तव मे तो यह जीवन से भगोड़ापन है,Continue reading “नव-सन्यास ( Neo – Sanyas)”

हकलाहट

हर काल समय और देश में हकलाहट के दोष से ग्रस्त लोग मिलते हैं ।अरस्तु, डेमोंस्थनीज, चार्ल्स लैंब, मोजेज आदि लोग हकलाहट से ग्रस्त थे । हकलाहट पुरुषों में स्त्रियों की अपेक्षा कई गुना अधिक मिलती है । इस दोष से ग्रस्त व्यक्तियों में 90% में हकलाहट 6 वर्ष के पहले ही प्रारंभ हो जातीContinue reading “हकलाहट”