जो दीपक की तरह जलने को तैयार हो (Ready to burn like a lamp)

गिरे हुओं को उठाना, पिछड़े हुओं को आगे बढ़ाना, भूले को रहा बताना और जो अशांत हो रहा है उसे शांतिदायक स्थान पर पहुंचा देना, यह वस्तुत: ईश्वर की सेवा ही है. जब हम दुखी और दरिद्र को देखकर व्यथित होते हैं और मलिनता को स्वच्छता में बदलने के लिए बढ़ते हैं तो समझना चाहिएContinue reading “जो दीपक की तरह जलने को तैयार हो (Ready to burn like a lamp)”

व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास की धुरी- “अध्यात्म”The axis of all-round development of personality – “Spirituality”

मनुष्य के व्यक्तिगत जीवन एवं मानव समाज में सुख शांति की परिस्थितियां किस आधार पर बनेगी इस प्रश्न का संक्षिप्त उत्तर दिया जाए तो वह होगा मनुष्य में मनुष्यता के विकास से । इसी को प्राचीन काल से व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास भी कह सकते हैं ।व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास का तात्पर्य मात्र शारीरिक स्वच्छताContinue reading “व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास की धुरी- “अध्यात्म”The axis of all-round development of personality – “Spirituality””